﻿"तुम्हें एक-दूसरे के मुक़ाबले में बहुतायत के प्रदर्शन और घमंड ने ग़फ़़लत में डाल रखा है,"
यहाँ तक कि तुम क़ब्रिस्तानों में पहुँच गए
"कुछ नहीं, तुम शीघ्र ही जान लोगे"
"फिर, कुछ नहीं, तुम्हें शीघ्र ही मालूम हो जाएगा -"
"कुछ नहीं, अगर तुम विश्वसनीय ज्ञान के रूप में जान लो! (तो तुम धन-दौलत के पुजारी न बनो) -"
अवश्य ही तुम भड़कती आग से दो-चार होगे
"फिर सुनो, उसे अवश्य देखोगे इस दशा में कि वह यथावत विश्वास होगा"
फिर निश्चय ही उस दिन तुमसे नेमतों के बारे में पूछा जाएगा
